Bihar And Orissa Public Demand Recovery Act 1914 Pdf In Hindi | !!link!!
हालांकि पूरे अधिनियम में 7 अध्याय और लगभग 50 धाराएं हैं, कुछ महत्वपूर्ण धाराएं इस प्रकार हैं:
बिहार और उड़ीसा में सार्वजनिक मांगों (Public Demands) की वसूली से संबंधित कानूनों को समेकित और संशोधित करना।
यह अधिनियम ब्रिटिश शासन के दौरान लाया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य राज्य सरकार (तत्कालीन बिहार और उड़ीसा प्रांत) के पास देय धनराशि (बकाया) को एक विशेष और त्वरित प्रक्रिया के माध्यम से वसूली सुनिश्चित करना था। आमतौर पर सिविल कोर्ट में मुकदमे लंबे चलते हैं, इसलिए राजस्व और अन्य सरकारी बकायों की वसूली के लिए एक कड़े कानून की आवश्यकता महसूस की गई थी।
बकायेदार की संपत्ति को कुर्क (Attach) और नीलाम करके वसूली करना।
के तहत आपत्ति का निपटारा करने के बाद, प्रमाणपत्र अधिकारी धारा 10 के तहत अंतिम आदेश पारित करता है।
चूँकि यह एक पुराना और जटिल कानूनी दस्तावेज़ है, इसके हिंदी अनुवाद सरकारी वेबसाइटों या कानून की किताबों पर उपलब्ध हैं। आप निम्नलिखित तरीकों से इसे खोज सकते हैं:
(Bihar and Orissa Public Demands Recovery Act, 1914) के महत्वपूर्ण पहलुओं को हिंदी में समझने में आपकी मदद करेगी।
प्रमाण-पत्र जारी होने के बाद, देनदार को 30 दिनों का नोटिस दिया जाता है कि वह राशि चुकाए या फिर आपत्ति (Objection) दर्ज कराए।
Any order passed by the Certificate Officer can be appealed under Section 60 of the Act .
नोटिस मिलने के बाद, देनदार के तहत प्रमाणपत्र अधिकारी के समक्ष आपत्ति दायर कर सकता है। यह एक महत्वपूर्ण अवसर है जहाँ देनदार यह तर्क दे सकता है कि वह बकाया राशि का भुगतान नहीं करता है या राशि गलत है।
IndianKanoon.org का हिंदी अनुवाद। 6. निष्कर्ष और 2026 अपडेट
