इस वंदन में पुंडरीक स्वामी की आराधना की जाती है जिन्होंने करोड़ों मुनियों के साथ यहाँ से मुक्ति प्राप्त की थी.
शासन देवी पूजियें, शत्रुंजय की धार,विघ्न विदारण विघ्नहरू, सुख संपति दातार।साढबा माता आप हो, संघ तणी रखवाल,दर्शन करवा आविया, राखो नजर निहाल।। 1 ।।
की भी पूरी जानकारी चाहते हैं? Shree Siddhagiriraj Yatra Five Chaityavandans - Tattva Gyan palitana 5 chaityavandan in hindi full
इसके बाद ऊपर दिए गए स्थान-विशिष्ट पाठ और 'जंगचिंतामणि', 'नमुत्थुणं', 'लोगस्स' आदि सूत्रों का उच्चारण करें।
शांतिनाथ भगवान 16वें तीर्थंकर हैं। उन्हें "मृग लांछन" और "कंचन वर्णी काया" वाला बताया गया है। शत्रुंजय की धार
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नाभिराया कुल मंडनो, मरुदेवा माय। विघ्न विदारण विघ्नहरू
का अर्थ है- "हे प्रभु! मैं इस पर्वत पर आया हूँ। मुझे क्षमा करें।"
4. Fourth Chaityavandan: Shree Pundarik Swami (श्री पुंडरीक स्वामी)
पुंडरीक स्वामी और उनके 5 करोड़ मुनियों ने यहाँ मोक्ष प्राप्त किया था, जिसके कारण इस पर्वत का नाम "पुंडरीकगिरि" पड़ा।
सबसे गूढ़ और रहस्यमयी है। यहाँ श्रद्धालु कहता है:
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